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जानें वास्तु शास्त्र के अनुसार दक्षिण मुखी घर शुभ है या अशुभ ?

By December 17, 2022December 4th, 2023No Comments
वास्तु शास्त्र के अनुसार घर

कई बार मेहनत और जतन से बनाया हुआ घर लोगों को फलता नहीं है। इसकी वजह है घर को वास्तु शास्त्र के अनुसार ना बनाना और घर की दिशा गलत होने के कारण जातक को अनेक परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

क्या होता है वास्तु शास्त्र ?

वास्तु शास्त्र भारतीय ज्योतिष विद्या का ही एक अंग है जिसमें मकान, दफ़्तर अथवा कार्यालय को सही ढंग से बनाने के नियम दिये गये हैं। ज्योतिष शास्त्र में वास्तु नियमों को ध्यान में रखते हुए घर खरीदने या बनवाने से जातक को शुभ फल की प्राप्ति होती है। वास्तु शास्त्र के अंतर्गत दिशा, घर का मुख्य द्वार, बेडरूम तथा रसोई का स्थान आदि कई महत्वपूर्ण पहलू होते हैं।
आइये जानते हैं इंस्टाएस्ट्रो के ज्योतिषियों से वास्तु शास्त्र के कुछ आवश्यक नियम।

वास्तु शास्त्र

कौन सी दिशा में बना घर शुभ होता है ?

घर बनाते समय लोग दिशाओं को लेकर काफी असमंजस में रहते हैं। वास्तु शास्त्र के अनुसार कौन सी दिशा शुभ मानी जाती है और कौन सी अशुभ यह एक गंभीर मुद्दा है। ऐसे में कई लोगों का प्रश्न रहता है कि दक्षिण मुखी मकान शुभ या अशुभ होता है ? मान्यता है कि दक्षिण मुखी घर अशुभ फल देता है। परंतु यह पूरा सच नहीं है। यदि दक्षिण दिशा में वास्तु शास्त्र के नियमों का पालन करते हुए घर बनाया जाए, तो नकारात्मक प्रभावों से बच सकते हैं।

दक्षिण मुखी घर

वास्तु के अनुसार दक्षिण मुखी घर के होते हैं, जिसका मुख्य द्वार दक्षिण दिशा की ओर होता है। दक्षिण मुखी घर का मुख्य द्वार दक्षिण दिशा में स्थित होता है। और मान्यता है कि दक्षिण मुखी घर शुभ नहीं होता है, क्योंकि इससे वातावरण की सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह नहीं बन पाता है।

दक्षिण मुखी घर

जानें क्या होते हैं दक्षिण मुखी घर के दोष ?

दक्षिण पश्चिम दिशा में घर बनाने से मानव को यह हानि हो सकती हैं –
मौद्रिक हानि: व्यवसाय में अचानक भारी नुकसान हो सकता है। नकदी में बाधा का सामना करना पड़ सकता है।
स्वास्थ्य समस्याएं: आकस्मिक दुर्घटनाएं, पैर में चोट लगना आदि हो सकता है। अचानक तबीयत भी बिगड़ सकती है।
सामाजिक प्रतिष्ठा: पति-पत्नी के बीच झगड़े हो सकते हैं वैवाहिक जीवन में खटास बनी रहेगी। संतान हानिकारक संगति में फँस सकती है जिससे समाज में मान-सम्मान कम होगा।

दक्षिण मुखी घर को ठीक कैसे किया जा सकता है ?

वास्तु शास्त्र कहता है कि कोई भी घर खराब नहीं होता है। दक्षिण मुखी घर को भी यदि वास्तु योजना के अनुसार बनाया जाये तो वह शुभ हो सकता है। बस आवश्यकता है निर्माण के समय कुछ सावधानियां बरतने की।

जानें दक्षिण मुखी मकान का वास्तु दोष कैसे दूर करें ?

  • दक्षिण मुखी घर में मुख्य दरवाजे के स्थान और डिजाइन को लेकर अत्यधिक सावधान रहना चाहिए।
  • प्रवेश द्वार के दोनों तरफ गायत्री मंत्र के दो स्पीकर लगाने चाहिए। ऐसा करने से परिवार का वातावरण खुशनुमा रहता है और सदस्यों के बीच सामंजस्य बना रहता है।
  • जिस ज़मीन पर घर बना रहे हैं उसकी लंबाई और चौड़ाई को नौ बराबर भागों में बांटना चाहिए।
  • यदि दक्षिण मुखी घर का प्रवेश द्वार चौथे पद पर हो तो पूरे घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
  • यदि मुख्य द्वार बहुत छोटा है, तो इसे बड़ा करने के लिए पद 3, 2 या 1 की ओर बढ़ा सकते हैं।
  • ध्यान रहे कि प्रवेश द्वार के लिए पांचवें से नौवें पद का प्रयोग नहीं करना चाहिए। इसके अतिरिक्त मुख्य द्वार घर में सबसे बड़ा होना चाहिए।
  • घर का प्रवेश द्वार अंदर की ओर खुलना चाहिए। प्रवेश द्वार पर दहलीज अवश्य बनाना चाहिए। इससे हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त होती है।
  • दक्षिण मुखी घर में उत्तर दिशा की ओर एक अतिरिक्त प्रवेश द्वार बना सकते हैं।

दक्षिण मुखी घर की सुरक्षा के लिए रोग निवारण यंत्र 

जब घर का प्रवेश द्वार दक्षिण पूर्व दिशा में होता है, तब घर की महिलाओं को स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। इसका उपाय है – घर के मुख्य द्वार के सामने वाली दीवार पर रोग निवारण यंत्र लगाएं। इससे वास्तु दोष मिटता है परिवार की महिलाएं सुरक्षित रहती हैं।

रोग निवारण यंत्र

जानें दक्षिण मुखी घर में पूजा कक्ष के लिए वास्तु नियम

आइये जानते हैं पूजा घर के लिए वास्तु नियम –
वास्तु शास्त्र के अनुसार दक्षिण मुखी घर में उत्तर-पूर्व भाग पूजा कक्ष बनाने के लिए उपयुक्त स्थान होता है। यदि घर में जगह कम है और अलग से पूजा कक्ष बनाना संभव नहीं है, तो लिविंग रूम के ही एक हिस्से में मंदिर बनाया जा सकता है।

जानें दक्षिण मुखी घर में मास्टर बेडरूम के लिए वास्तु नियम

आइये जानते हैं बेडरूम के लिए वास्तु नियम –
वास्तु शास्त्र के अनुसार मास्टर बेडरूम के लिए दक्षिण-पश्चिम दिशा को शुभ स्थान माना जाता है। यदि घर में कई मंजिलें हैं, तो मास्टर बेडरूम का निर्माण सबसे ऊपर की मंजिल पर किया जाना चाहिए।

बेडरूम के लिए वास्तु नियम

जानें दक्षिण मुखी घर में रसोई के लिए उपयुक्त स्थान 

वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में रसोई बनाने के लिए सबसे उपयुक्त स्थान है दक्षिण-पूर्व दिशा। ध्यान रहे कि खाना बनाते समय आपका मुख पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए। साथ ही यह भी सुनिश्चित करें कि रसोई घर में सूरज की रोशनी पड़े। रसोई घर बनाने के लिए उत्तर-पश्चिम दिशा भी उपयुक्त होती है। ऐसे में यह सुनिश्चित करें कि खाना बनाते समय आपका मुंह पश्चिम दिशा की ओर हो।

दक्षिण मुखी घर में कहाँ होना चाहिए बच्चों का कमरा ?

घर में बच्चों के बेडरूम का निर्माण उत्तर-पश्चिम भाग में होना चाहिए। इसके अतिरिक्त घर के दक्षिण या पश्चिम भागों का भी प्रयोग कर सकते हैं। इसी दिशा में गेस्ट रूम यानि कि मेहमानों का कमरा भी बनाया जा सकता है।

बच्चों का कमरा

दक्षिण मुखी घर में सीढ़ी किस दिशा में बनाएं ?

वास्तु शास्त्र के अनुसार दक्षिण प्रवेश घर में सीढ़ी दक्षिण कोने में बनाई जा सकती हैं।

जानें दक्षिणमुखी घर के लिए उपयुक्त रंग 

वास्तु शास्त्र की नियमों के अनुसार दक्षिणमुखी घरों के लिए भूरा, लाल और नारंगी रंग शुभ माना जाता है। घर की डिजाइन बनाते समय इन रंगों का अधिक उपयोग करना चाहिए।

House

कहाँ करें दक्षिण मुखी घर में भूमिगत जल संग्रहण ?

दक्षिणमुखी घर के सामने कोई भूमिगत टैंक या बोरवेल नहीं बनाना चाहिए। घर में पानी और सेप्टिक टैंक बनाने के लिए ज्योतिष की सलाह लेनी चाहिए।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न –

1. क्या होता है दक्षिण मुखी घर?

दक्षिण मुखी घर का मुख्य द्वार दक्षिण की दिशा में बना होता है।

2. दक्षिण मुखी मकान शुभ या अशुभ होता है?

ज्योतिष शास्त्र के दक्षिण मुखी घर अशुभ माना गया है। परंतु कुछ ज्योतिष उपाय से इन इन दोषों का निवारण किया जा सकता है। वास्तु शास्त्र के नियमों का पालन करके भवन निर्माण करने से दक्षिण दोष मिट जाता है।

3. क्या होते हैं दक्षिण मुखी घर के दोष ?

दक्षिण मुखी घर में रहने वाले लोगों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। उन्हें व्यवसाय में अकस्मात् नुकसान हो सकता है। हादसों में चोट लग सकती है और कोई गंभीर रोग भी हो सकता है। शादीशुदा जिंदगी में झगड़े हो सकते हैं और समाज में मान-सम्मान कम होने की संभावना बढ़ जाती है।

4. बेडरूम के लिए वास्तु नियम क्या हैं?

मास्टर बेडरूम हमेशा घर के दक्षिण-पश्चिम दिशा में होना चाहिए। वास्तु शास्त्र के अनुसार यह सुखी दाम्पत्य जीवन के लिए सबसे उपयुक्त स्थान है।

5. क्या है घर में पूजा घर के लिए वास्तु नियम?

घर की उत्तर-पूर्व दिशा में पूजा कक्ष बनाना चाहिए। यह वास्तु की दृष्टि से शुभ होता है। ऐसा करने से देवी-देवताओं का आशीर्वाद बना रहता है।

और पढ़ें – पूजा घर में रखें इन बातों का ध्यान: घर में होगा देवी-देवताओं का वास।

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Yashika Gupta

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