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मार्गशीर्ष पूर्णिमा व्रत 2022: जानें व्रत पूजा विधि और महत्व।

By November 25, 2022No Comments

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार मार्गशीर्ष माह का अत्यधिक महत्व होता है। इस माह में विष्णु जी की पूजा और दान-पुण्य को अत्यधिक महत्वपूर्ण माना गया है। मार्गशीर्ष माह में पड़ने वाली पूर्णिमा को मार्गशीर्ष पूर्णिमा के रूप में जाना जाता है। इस दिन विशेष रूप से व्रत किया जाता है। जिसे मार्गशीर्ष पूर्णिमा व्रत कहते हैं। हिन्दू पंचांग के अनुसार मार्गशीर्ष माह, नौवां महीना होता है। इस माह को पवित्र और समर्प्रित माह माना जाता है।
हिन्दू शास्त्रों के अनुसार मार्गशीर्ष माह को अत्यधिक शुभ माह माना गया है। मार्गशीर्ष पूर्णिमा व्रत रखने से कई शुभ फल की प्राप्ति होती है।

मार्गशीर्ष पूर्णिमा तिथि 2022-

वर्ष 2022 में मार्गशीर्ष पूर्णिमा तिथि का आरंभ 7 दिसंबर को सुबह 8 बजकर 1 मिनट से होगा। मार्गशीर्ष पूर्णिमा तिथि की समाप्ति 8 दिसंबर को सुबह 9 बजकर 37 मिनट पर होगी।

मार्गशीर्ष पूर्णिमा व्रत 2022 कब है?

हिन्दू कैलेंडर के अनुसार मार्गशीर्ष माह अंतिम दिन मार्गशीर्ष पूर्णिमा व्रत रखा जाता है। मार्गशीर्ष पूर्णिमा के दिन श्री नारायण की पूजा की जाती है। वर्ष 2022 में मार्गशीर्ष पूर्णिमा व्रत 8 दिसंबर दिन गुरुवार को है।

मार्गशीर्ष पूर्णिमा व्रत पूजा विधि-

  • इस दिन प्रातः काल उठकर स्नान करना चाहिए।
  • मार्गशीर्ष पूर्णिमा व्रत के दिन किसी पवित्र नदी में स्नान करें।
  • आप नहाने के पानी में तुलसी के पत्ते डालकर भी स्नान कर सकते हैं।
  • स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र को धारण करें और व्रत का संकल्प लें।
  • इसके पश्चात सूर्य को जल से अर्घ्य दें और विष्णु जी की पूजा करें।
  • पूजन के दौरान वेदी हवन को करना अत्यधिक शुभ माना जाता है।
  • हवन के समय ॐ नमो नारायण मंत्र का जाप करना चाहिए।
  • मार्गशीर्ष पूर्णिमा व्रत के दिन गरीबों को भोजन खिलाना चाहिए और दान करना चाहिए।
  • रात्रि के समय चंद्र देव को अर्घ्य देना शुभ माना जाता है।
  • मार्गशीर्ष पूर्णिमा की रात्रि को चंद्र देव की पूजा करना से मन की शांति प्राप्त होती है।

मार्गशीर्ष पूर्णिमा व्रत का महत्व-

इस पर्व के दिन भगवान विष्णु और साथ ही साथ शिव जी की पूजा का विशेष महत्व है। मान्यताओं के अनुसार कहा जाता है। इस दिन चंद्र देव का संसार के सभी तत्वों पर नियंत्रण रहता है। इसलिए मार्गशीर्ष पूर्णिमा के दिन को अत्यधिक शुभ माना गया है। हिन्दू शास्त्रों में इस दिन दान करना अत्यधिक फल देता है। मार्गशीर्ष पूर्णिमा के दिन दान करना अन्य पूर्णिमा के दिन दान करने से 32 गुना अधिक शुभ माना जाता है। इस दिन भगवान सत्यनारायण की पूजा करनी चाहिए और साथ ही साथ कथा भी सुननी चाहिए। इससे इस दिन शुभ परिणाम प्राप्त होते हैं।

मार्गशीर्ष पूर्णिमा व्रत में ध्यान रखें ये बातें-

  • इस दिन सुबह जल्दी सूर्योदय से पहले उठ जाना चाहिए।
  • मार्गशीर्ष पूर्णिमा के दिन किसी पवित्र नदी में स्नान करें।
  • नहाने के पानी में तुलसी की जड़ या पत्ते अवश्य डालें।
  • यह व्रत पूरी श्रद्धा से और पवित्र मन और साफ-सफाई के साथ रखना चाहिए।
  • मार्गशीर्ष पूर्णिमा के दिन दान जरूर करें।
  • इस दिन मांसाहारी भोजन और मदिरा आदि का सेवन नहीं करना चाहिए।
  • अगर आप मार्गशीर्ष पूर्णिमा व्रत रख रहे हैं तो आपको दोपहर में विश्राम नहीं करना चाहिए।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न-

मार्गशीर्ष पूर्णिमा कब है 2022?
वर्ष 2022 में मार्गशीर्ष पूर्णिमा 8 दिसंबर दिन गुरुवार को है। इस दिन मार्गशीर्ष पूर्णिमा व्रत भी रखा जाएगा।

मार्गशीर्ष पूर्णिमा में चंद्रमा का क्या महत्व है?
इस पूर्णिमा में चंद्रमा का विशेष महत्व होता है। इस पूर्णिमा की रात्रि को चंद्रमा को अर्घ्य देने से मन की शांति प्राप्त होती है।

मार्गशीर्ष पूर्णिमा के दिन कौन से मंत्र का जाप करना चाहिए?
इस दिन ॐ नमो नारायण मंत्र का जाप करना चाहिए।

मार्गशीर्ष माह किस भगवान का प्रिय माह होता है?
यह माह श्री कृष्ण जी का प्रिय माह होता है। इसलिए सम्पूर्ण माह श्री कृष्ण की पूजा करना शुभ माना जाता है।

मार्गशीर्ष पूर्णिमा को और किस नाम से जानते हैं?
इस पूर्णिमा को बत्तीसी पूर्णिमा के नाम से भी जानते है। क्योंकि मार्गशीर्ष पूर्णिमा अन्य पूर्णिमा की अपेक्षा 32 गुना अधिक फल देते हैं।

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Jaya Verma

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