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धनु संक्रांति : जानें महत्व, पूजा विधि और कथा

By November 23, 2022No Comments

हिंदू धर्म में मान्यता है कि जब भी सूर्य का राशि परिवर्तन होता है तब संक्रांति पर्व मनाया जाता है। भारत में विभिन्न क्षेत्रों में इसे अलग नाम और विधि से मनाया जाता है। जब सूर्य धनु राशि में प्रवेश करता है, तब सूर्य का राशि परिवर्तन होता है और इस दिन को धनु संक्रांति के रूप में मनाया जाता है। दक्षिण भारत में धनु संक्रांति को धनुर्मास के नाम से जाता है। इस पर्व को कुछ क्षेत्रों में पौष संक्रांति भी बोला जाता है। उड़ीसा राज्य में पौष महीने के शुक्ल पक्ष के छठे दिन पर धनु यात्रा निकाली जाती है और विशेष प्रसाद तैयार किया जाता है।

धनु संक्रांति 2022

वर्ष 2022 में धनु संक्रांति दिनांक 16 दिसंबर दिन शुक्रवार को है। संक्रांति तिथि सुबह 10 बजकर 11 मिनट पर शुरू होगी।

क्या है धनु संक्रांति कथा ?

आइये पढ़ते हैं पौराणिक ग्रंथों के अनुसार धनु संक्रांति कथा-
एक बार जब सूर्य देवता अपने सात घोड़ों वाले रथ पर सवार होकर ब्रह्मांड की परिक्रमा कर रहे थे। तब लगातार चलने और विश्राम ना मिलने के कारण उनके घोड़े अत्यधिक थक गये। घोड़ों की ऐसी हालत देखकर भगवान सूर्य देव उन्हें पानी पिलाने के लिए तालाब के किनारे ले गए।
परन्तु ब्रह्मांड की परिक्रमा किसी भी हाल में रुकनी नहीं चाहिए क्योंकि इससे धरती पर जीवन का चक्र रुक सकता है। तभी सूर्य देव ने देखा की तालाब के किनारे दो गधे मौजूद थे। भगवान सूर्य ने घोड़ों को पानी पीने के लिए छोड़ दिया और गधों को अपने रथ में जोत दिया।
परिणाम यह हुआ कि रथ की गति धीमी हो गई। परन्तु गधों ने किसी तरह ब्रह्मांड का एक चक्कर पूरा कर लिया। और उस समय तक घोड़ों को विश्राम मिल गया। तभी से हर चार सौर वर्षों में एक सौर खरमास होने लगा और इसी खरमास में धनु संक्रांति का पर्व मनाया जाने लगा।

कैसे करें धनु संक्रांति की पूजा ?

आइये पढ़ते हैं धनु संक्रांति की पूजा विधि –
धनु सक्रांति के दिन प्रातःकाल जल्दी उठकर सूर्य देव को अर्घ्य दें और उनकी विधि विधान से पूजा करें। सूर्य भगवान को जल अर्पण करने के बाद फूल चढ़ायें और फिर फल अथवा मिठाई का भोग लगायें। कई क्षेत्रों में इस दिन प्रसाद के रूप में मीठी भात बनाने की परंपरा है। अंत में धूप जलायें और इस तरह धनु संक्रांति की पूजा संपन्न हो जाएगी।

धनु संक्रांति के दिन करें सत्यनारायण पूजा

संक्रांति पर्व पर भगवान सत्यनारायण की पूजा करने से विशेष फल मिलता है। इस दिन घर पर सत्यनारायण कथा करवायें। भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा करें। केले के पत्ते, फल, सुपारी, तुलसी, मेवा आदि का भोग लगायें।
इस दिन माता लक्ष्मी, महादेव एवं ब्रह्मा जी की भी पूजा-अर्चना करें। अंत में आरती करें और फिर चरणामृत का प्रसाद वितरण करें।
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धनु संक्रांति का महत्व

  • धनु संक्रांति के दिन पितरों का तर्पण करने का विशेष महत्व होता है। इस शुभ पर्व पर नदी अथवा सरोवर में स्नान कर के पितृ दोष से छुटकारा पा सकते हैं।
  • भारत के उड़ीसा राज्य में धनु संक्रांति के दिन विशेष तौर पर भगवान जगन्नाथ की पूजा की जाती है। इस दिन भगवान जगन्नाथ को मीठे भात का प्रसाद अर्पित किया जाता है।
  • मान्यता है कि धनु संक्रांति के दिन विवाह आदि शुभ कार्य नहीं किए जाते क्योंकि सूर्य के राशि परिवर्तन से कुछ लोगों पर बुरा असर पड़ता है।
  • इस दिन तीर्थ स्थल की यात्रा प्रारंभ करना शुभ माना जाता है।
  • धनु संक्रांति के दिन शीत ऋतु आरंभ होने का संकेत मिल जाता है।

धनु संक्रांति का प्रभाव –

सूर्य के राशि परिवर्तन से सभी राशियों पर प्रभाव पड़ता है।कहीं पर अधिक तो कहीं पर कम प्रभाव पड़ता है। आइये जानते हैं सभी राशियों पर धनु संक्रांति का असर –

मीन, कर्क और तुला राशि के जातकों के लिए धनु संक्रांति शुभ होती है। इन्हें नौकरी अथवा कारोबार में तरक्की प्राप्त होती है। इस समय उनकी सेहत भी अच्छी रहती है।
मेष, मिथुन, सिंह, वृश्चिक, धनु तथा कुंभ राशि के जातकों के लिए धनु संक्रांति का समय कुछ ख़ास अच्छा या बुरा नहीं होता है। उन्हें धन लाभ तो होता है परंतु खर्च भी बढ़ जाते हैं।
वृषभ, कन्या तथा मकर राशियों के जातकों के लिए धनु संक्रांति शुभ नहीं होती। इन्हें अपनी सेहत को लेकर सावधान रहना चाहिए। और पैसा खर्च करने में भी सतर्क रहना चाहिए।

धनु संक्रांति के उपाय

  • इस दिन सूर्य देव की पूजा करने से साधक का भविष्य सूर्य की तरह चमकता है।
  • इस दिन पवित्र नदी जैसे गंगा, नर्मदा आदि में स्नान करने से पापों से मुक्ति मिल जाती है।
  • बुद्धि और विवेक का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए धनु संक्रांति के दिन सूर्य देव की पूजा की जाती है।
  • इस दिन दान देने और पैतृक पूजा करने का भी विशेष महत्व है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न –

धनु संक्रांति 2022 कब है ?
वर्ष 2022 में धनु संक्रांति 16 दिसंबर को है।

धनु संक्रांति का महत्व क्या है ?
धनु संक्रांति के दिन सूर्य देव को जल अर्पित करने से भविष्य सूर्य की तरह चमकता है। इस दिन पवित्र नदी में स्नान करने का भी महत्व है।

धनु संक्रांति की पूजा विधि क्या है ?
इस दिन सूर्य देव को अर्घ्य देकर उनकी पूजा करें। और फिर भगवान सत्यनारायण की कथा करवायें। भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विधिपूर्वक पूजा करें। प्रसाद में मीठी भात का भोग ज़रूर लगायें।

क्या है धनु संक्रांति कथा ?
एक बार अपने रथ पर सवार होकर सूर्यदेव ब्रह्मांड की परिक्रमा लगा रहे थे। जब वे रास्ते में अपने घोड़ों को पानी पिलाने के लिए रुके, तब उन्होंने दो गधों को अपने रथ में जोत दिया था। इस वजह से परिक्रमण की गति धीमी पड़ गई। और परिणामस्वरूप हर चार वर्षों में एक खरमास होने लगा। इसी खरमास में धनु संक्रांति मनाई जाती है।

धनु संक्रांति का राशियों पर क्या प्रभाव पड़ता है ?
सूर्य के राशि परिवर्तन का सभी बारह राशियों पर सकारात्मक या नकारात्मक प्रभाव होता है। मीन, कर्क और तुला राशि पर धनु संक्रांति का शुभ प्रभाव होता है। वहीं वृषभ, कन्या तथा मकर राशियों के जातकों के लिए धनु संक्रांति अशुभ होती है।

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Yashika Gupta

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