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Chhath Pooja 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त कब है?

By October 19, 2022March 27th, 2026No Comments
chhath puja

भारतीय पर्वों में छठ पूजा 2026 का विशेष महत्व है। यह चार दिनों तक चलने वाला पर्व दिवाली के बाद मनाया जाता है, जिसमें सूर्य देव और छठी मैया की पूजा कर सुख-समृद्धि, संतान की दीर्घायु और मान-सम्मान की कामना की जाती है।

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छठ पूजा 2026  कब है?

हिंदी पंचांग के अनुसार छठ पूजा कार्तिक मास की षष्ठी तिथि को मनाई जाती है। वर्ष 2026 में छठ पूजा 16 नवंबर, सोमवार को मनाई जाएगी।

छठ पूजा की सम्पूर्ण तिथि

नहाय-खाय: 14 नवंबर 2026
खरना: 15 नवंबर 2026
डूबते सूर्य को अर्घ्य: 16 नवंबर 2026
उगते सूर्य को अर्घ्य: 17 नवंबर 2026

उगते सूर्य को अर्घ्य

छठ पूजा कहाँ और कैसे मनाई जाती है?

छठ पूजा 2026 मुख्य रूप से बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश में मनाई जाती है, लेकिन अब यह देशभर और विदेशों में भी लोकप्रिय हो चुकी है। यह पूजा नदियों, तालाबों या घाटों के किनारे की जाती है, जहां श्रद्धालु सूर्य देव को अर्घ्य देते हैं। कई लोग घरों में भी कृत्रिम घाट बनाकर पूजा करते हैं। इस पर्व में स्वच्छता और पवित्रता का विशेष ध्यान रखा जाता है।

छठ पूजा 2026 का शुभ समय

षष्ठी तिथि की शुरुआत 16 नवंबर 2026 को शाम के समय होगी और अगले दिन तक इसका प्रभाव रहेगा। इस दौरान डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य देने का विशेष महत्व होता है।

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नहाय-खाय और खरना क्या है?

छठ पूजा का पहला दिन नहाय-खाय होता है, जिससे इस पर्व की शुरुआत होती है। इस दिन घर की साफ-सफाई की जाती है और शुद्ध भोजन ग्रहण किया जाता है, जिसमें चना, साग और चावल शामिल होते हैं। दूसरे दिन खरना होता है, जिसमें व्रत रखा जाता है। शाम के समय गुड़ की खीर ग्रहण की जाती है और इसके बाद 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू होता है।

Kharna

छठ पूजा के लिए सामग्री

  1. बांस की टोकरी, सूप, लोटा, थाली
  2. साड़ी और धोती
  3. गंगाजल, दूध
  4. सिंदूर, धूप, कुमकुम
  5. मिठाई, गुड़, शहद
  6. गेहूं, चावल, आटा
  7. मिट्टी के दीपक
  8. पान, सुपारी, गन्ना
  9. फल जैसे केला, सेब, शकरकंदी
  10. सिंघाड़ा, मूली, अदरक का पौधा

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छठ पूजा की कथा

पौराणिक कथा के अनुसार प्रियवत नाम के एक राजा थे, जो संतान न होने के कारण दुखी रहते थे। महर्षि कश्यप के कहने पर उन्होंने यज्ञ किया, जिसके बाद उन्हें संतान प्राप्त हुई, लेकिन जन्म के तुरंत बाद उसकी मृत्यु हो गई।

तब राजा को आकाश में देवी षष्ठी का दर्शन हुआ, जो ब्रह्मा की पुत्री मानी जाती हैं। देवी ने आशीर्वाद देकर उनकी संतान को जीवन प्रदान किया। तभी से छठी मैया की पूजा की परंपरा शुरू हुई, जो संतान की रक्षा और सुख-समृद्धि के लिए की जाती है।

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36 घंटे का निर्जला व्रत क्यों होता है खास?

छठ पूजा का व्रत हिंदू धर्म के सबसे कठिन व्रतों में से एक माना जाता है। इसमें श्रद्धालु लगभग 36 घंटे तक बिना पानी और भोजन के व्रत रखते हैं। यह व्रत आत्म-संयम, श्रद्धा और मानसिक शक्ति का प्रतीक है। मान्यता है कि इस कठोर तपस्या से सूर्य देव और छठी मैया की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

छठ पूजा का महत्व

हिंदू धर्म में छठ पूजा को अत्यंत पवित्र पर्व माना जाता है। इस दिन सूर्य देव की पूजा की जाती है, जिन्हें जीवन का आधार माना गया है। छठी मैया की पूजा से संतान की रक्षा होती है और निःसंतान दंपतियों को संतान सुख प्राप्त होने की मान्यता है। यह पर्व न केवल धार्मिक बल्कि सामाजिक और पारिवारिक एकता का भी प्रतीक है।

आधुनिक समय में छठ पूजा का महत्व

आज के समय में भी छठ पूजा केवल परंपरा नहीं, बल्कि अनुशासन, आस्था और प्रकृति के प्रति सम्मान का प्रतीक है। यह पर्व हमें सूर्य, जल और पर्यावरण के महत्व को समझने का अवसर देता है।

छठ पूजा में क्या करें?

  • पूजा से पहले घर और आसपास की साफ-सफाई रखें।
  • व्रत के दौरान सात्विक और शुद्ध आहार का पालन करें।
  • अर्घ्य देते समय पूरे मन से पूजा करें और जल्दबाजी न करें।

छठ पूजा में क्या न करें?

  • पूजा के दौरान अपवित्रता या लापरवाही न करें।
  • व्रत के नियमों को बीच में न तोड़ें।
  • श्रद्धा के बिना केवल औपचारिकता के लिए पूजा न करें।

निष्कर्ष

छठ पूजा आस्था, संयम और श्रद्धा का महत्वपूर्ण पर्व है। चार दिनों तक चलने वाला यह अनुष्ठान न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह मानसिक शांति, अनुशासन और सामाजिक संतुलन को भी मजबूत करता है, जिससे व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और स्थिरता आती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

 

1. छठ पूजा 2026 का व्रत कितने दिन का होता है?

छठ पूजा 2026 का व्रत कुल चार दिनों तक चलता है, जिसमें नहाय-खाय से शुरुआत होती है और उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ यह व्रत पूर्ण होता है।
 

2. छठ पूजा में 36 घंटे का व्रत क्यों रखा जाता है?

इस व्रत को आत्म-संयम और श्रद्धा का प्रतीक माना जाता है। 36 घंटे निर्जला व्रत रखने से साधक को मानसिक शक्ति और आध्यात्मिक शुद्धि प्राप्त होती है।
 

3. छठ पूजा में अर्घ्य देने का क्या महत्व है?

अर्घ्य देना सूर्य देव के प्रति आभार व्यक्त करने का प्रतीक है। डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य देने से जीवन में ऊर्जा, स्वास्थ्य और संतुलन बना रहता है।
 

4. क्या छठ पूजा केवल महिलाओं द्वारा किया जाता है?

हालांकि अधिकतर महिलाएं यह व्रत रखती हैं, लेकिन पुरुष भी श्रद्धा और नियमों के साथ छठ पूजा का व्रत कर सकते हैं और पूजा में भाग ले सकते हैं।
 

5. छठ पूजा के दौरान किन बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए?

छठ पूजा में स्वच्छता, शुद्धता और नियमों का पालन अत्यंत आवश्यक होता है। व्रत के दौरान सात्विकता बनाए रखें और पूजा पूरी श्रद्धा और अनुशासन से करें।
 

6. क्या छठ पूजा घर पर भी की जा सकती है?

यदि नदी या तालाब उपलब्ध न हो, तो घर पर कृत्रिम घाट बनाकर भी छठ पूजा की जा सकती है। मुख्य बात श्रद्धा और विधि-विधान का पालन करना है।
 

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Jaya Verma

About Jaya Verma

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